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तेरी मदह-ख़्वाँ हर ज़बाँ ग़ौस-ए-आज़म / Teri Madh-Khwan Har Zabaan Ghaus-e-Azam

रौनक़-ए-कुल-औलिया, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर ! पेशवा-ए-अस्फ़िया, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर ! तेरी मदह-ख़्वाँ हर ज़बाँ, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! तेरा नाम मोमिन की जाँ, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! या महबूब-ए-सुब्हानी ! तुम हो क़ुत्ब-ए-रब्बानी या महबूब-ए-सुब्हानी ! तुम हो क़ुत्ब-ए-रब्बानी पनाह-ए-ग़रीबाँ तेरी ज़ात-ए-वाला तेरा घर है दारुल-अमाँ, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! तेरी मदह-ख़्वाँ हर ज़बाँ, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! तेरा नाम मोमिन की जाँ, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! या महबूब-ए-सुब्हानी ! तुम हो क़ुत्ब-ए-रब्बानी या महबूब-ए-सुब्हानी ! तुम हो क़ुत्ब-ए-रब्बानी ज़माना न क्यूँकर हो मेहमाँ कि तुम ने बिछाया है रहमत का ख़्वाँ, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! तेरी मदह-ख़्वाँ हर ज़बाँ, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! तेरा नाम मोमिन की जाँ, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! या महबूब-ए-सुब्हानी ! तुम हो क़ुत्ब-ए-रब्बानी या महबूब-ए-सुब्हानी ! तुम हो क़ुत्ब-ए-रब्बानी जिसे शक हो वो ख़िज़्र से पूछ देखे तेरी मजलिसों का समाँ, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! तेरी मदह-ख़्वाँ हर ज़बाँ, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! तेरा नाम मोमिन की जाँ, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! या महबूब-ए-सुब्हानी ! तुम हो क़ुत्ब-ए-रब्बानी या महबूब-ए-सुब्हानी ! तुम...

सरापा ख़ता हूँ निगाह-ए-करम हो | मैं सब से बुरा हूँ निगाह-ए-करम हो / Sarapa Khata Hoon Nigah-e-Karam Ho | Main Sab Se Bura Hoon Nigah-e-Karam Ho

सरापा ख़ता हूँ, निगाह-ए-करम हो मैं सब से बुरा हूँ, निगाह-ए-करम हो मुझे माँगने का सलीक़ा नहीं है मगर माँगता हूँ, निगाह-ए-करम हो मैं क्यूँ दर-ब-दर ठोकरें खाऊँ जा कर मैं बे-आसरा हूँ, निगाह-ए-करम हो कहाँ दर-ब-दर ठोकरें खाऊँ जा कर तुम्हारा गदा हूँ, निगाह-ए-करम हो हुज़ूर ! आप से आप को माँगता हूँ फ़क़ीर आप का हूँ, निगाह-ए-करम हो किसी और से मुझ को निस्बत नहीं है मैं सिर्फ़ आप का हूँ, निगाह-ए-करम हो मुनीर आप से और गुज़ारिश करूँ क्या यही चाहता हूँ, निगाह-ए-करम हो मेरी दास्ताँ मुख़्तसर हो रही है मैं बुझता दिया हूँ, निगाह-ए-करम हो निगाह-ए-करम, ऐ पनाह-ए-दो-'आलम ! अमाँ चाहता हूँ, निगाह-ए-करम हो यक़ीनन तेरी रहमतों ने सँभाला मैं जब भी गिरा हूँ, निगाह-ए-करम हो तुम्हारी ही निस्बत है सरमाया मेरा मैं सिर्फ़ आप का हूँ, निगाह-ए-करम हो मुझे अपने क़दमों में बुलवा लो, आक़ा ! करम, शाह-ए-वाला ! निगाह-ए-करम हो 'अता कीजिए हाज़री का क़रीना मदीने चला हूँ, निगाह-ए-करम हो मुझे ख़्वाब-ए-ग़फ़लत से बेदार कर दो मैं सोया पड़ा हूँ, निगाह-ए-करम हो ना'त-ख़्वाँ: मरग़ूब अहमद हमदानी हाजी मुश्ताक़ अत्तारी ...

मैं तेरे क़ुर्बान मुहम्मद / Main Tere Qurban Muhammad

मैं तेरे क़ुर्बान, मुहम्मद ! मैं तेरे क़ुर्बान कहीं मुज़म्मिल, कहीं मुदस्सिर या रूह-उल-क़ुरआन मैं तेरे क़ुर्बान, मुहम्मद ! मैं तेरे क़ुर्बान 'अर्श-ए-बरीं से फ़र्श-ए-ज़मीं तक सब तेरा सरमाया ये 'आलम या वो 'आलम हो, सब पे तेरा साया ये रुत्बा ये शान, मुहम्मद ! मैं तेरे क़ुर्बान मैं तेरे क़ुर्बान, मुहम्मद ! मैं तेरे क़ुर्बान औज-ए-सुरय्या, 'अर्श-ए-बरीं सब तेरे क़दम के नीचे हूर-ओ-मलाइक, जिन्न-ओ-बशर सब तेरे पीछे पीछे ऐ रब के मेहमान मुहम्मद ! मैं तेरे क़ुर्बान मैं तेरे क़ुर्बान, मुहम्मद ! मैं तेरे क़ुर्बान तेरी याद में रोने वाली आँख जिसे मिल जाए रद्द-ए-बला हो, ग़म की दवा हो, दामन भी धुल जाए बख़्शिश का सामान, मुहम्मद ! मैं तेरे क़ुर्बान मैं तेरे क़ुर्बान, मुहम्मद ! मैं तेरे क़ुर्बान अदीब ! आख़िर मेरी मोहब्बत इतना तो रंग लाई मेरी ज़बाँ से ना'त-ए-मुहम्मद ख़ल्क़त सुनने आई मेरे सुख़न की जान मुहम्मद ! मैं तेरे क़ुर्बान मैं तेरे क़ुर्बान, मुहम्मद ! मैं तेरे क़ुर्बान ना'त-ख़्वाँ: हूरिया फ़हीम अंबर अशरफ़ नवल ख़ान सय्यिदा अरीबा फ़ातिमा mai.n tere qurbaan, muhammad ! mai.n t...

बरस रहा है करम का सावन हुज़ूर आए हुज़ूर आए / Baras Raha Hai Karam Ka Sawan Huzoor Aaye Huzoor Aaye

Baras Raha Hai Karam Ka Sawan Lyrics in Hindi, English & Urdu बरस रहा है करम का सावन, हुज़ूर आए, हुज़ूर आए हैं उजले उजले गुलों के दामन, हुज़ूर आए, हुज़ूर आए हैं रूह-परवर सभी नज़ारे, जहाँ में आए नबी हमारे भरा है ख़ुश्बू से आँगन आँगन, हुज़ूर आए, हुज़ूर आए था ज़िक्र जिस का सदी सदी में, वो नूर फैला गली गली में चमक उठे हैं दिलों के दर्पन, हुज़ूर आए, हुज़ूर आए ख़ुदा-ए-ग़फ़्फ़ार मेहरबाँ है, ख़िज़ाँ के क़ब्ज़े में ख़ुद ख़िज़ाँ है बहार पर है हक़ीक़ी जोबन, हुज़ूर आए, हुज़ूर आए जहाँ में निकले हैं यूँ सवेरे कि मुँह छुपाने लगे अँधेरे नज़र नज़र में हैं दीप रौशन, हुज़ूर आए, हुज़ूर आए यक़ीन कहता है यूँ गुमाँ से, बढ़ी ज़मीं आज आसमाँ से हैं रश्क-ए-जन्नत यहाँ के गुलशन, हुज़ूर आए, हुज़ूर आए हवाएँ हैं नग़्मा-बार, नाज़िश ! चमन भी हैं पुर-बहार, नाज़िश ! ये कह रही है दिलों की धड़कन, हुज़ूर आए, हुज़ूर आए शायर: मुहम्मद हनीफ़ नाज़िश क़ादरी ना'त-ख़्वाँ: हूरिया फ़हीम क़ादरी baras raha hai karam ka saawan huzoor aae, huzoor aae hai.n ujle ujle gulo.n ke daaman huzoor aae, huzoor aae hai.n rooh-parwar sabhi naz...

मुहम्मद मुस्तफ़ा आए मुहम्मद मुस्तफ़ा आए / Muhammad Mustafa Aaye Muhammad Mustafa Aaye

अल्लाहुम्म स़ल्लि-'अला सय्यिदिना मुह़म्मदिन अल्लाहुम्म स़ल्लि-'अला सय्यिदिना मुह़म्मदिन हो दुरूद तुम पर, या नबी ! हो सलाम तुम पर, या नबी ! अल्लाहुम्म स़ल्लि-'अला सय्यिदिना मुह़म्मदिन मुबारक हामिद-ओ-महमूद-ओ-अहमद मुज्तबा आए ख़ुशा नूर-उल-हुदा, शम्सुद्दुहा, बदरुद्दुजा आए ज़हे-क़िस्मत कि क़िस्मत-साज़-ओ-क़िस्मत-आश्ना आए प-ए-फ़िक्र-ए-बशर, ख़ैर-उल-बशर ख़ैर-उल-वरा आए मुहम्मद मुस्तफ़ा आए, मुहम्मद मुस्तफ़ा आए हो दुरूद तुम पर, या नबी ! हो सलाम तुम पर, या नबी ! अल्लाहुम्म स़ल्लि-'अला सय्यिदिना मुह़म्मदिन अल्लाहुम्म स़ल्लि-'अला सय्यिदिना मुह़म्मदिन उफ़क़ से बारिश-ए-अंजुम है ज़ुल्मत-आस्तानों पर बहारें ख़ाक पर रक़्साँ, सितारे आसमानों पर तजल्ली दर तजल्ली हो फ़ज़ा तो फिर ज़बानों पर न क्यूँ सल्ले-'अला, सल्ले-'अला, सल्ले-'अला आए मुहम्मद मुस्तफ़ा आए, मुहम्मद मुस्तफ़ा आए हो दुरूद तुम पर, या नबी ! हो सलाम तुम पर, या नबी ! अल्लाहुम्म स़ल्लि-'अला सय्यिदिना मुह़म्मदिन अल्लाहुम्म स़ल्लि-'अला सय्यिदिना मुह़म्मदिन जो 'अक़्ल-ओ-होश से 'आरी थे उन की होश-मंदी को सनम-स...

रुख़-ए-महबूब-ए-सुब्हानी के सदक़े / Rukh-e-Mehboob-e-Subhani Ke Sadqe

रुख़-ए-महबूब-ए-सुब्हानी के सदक़े मैं उस तस्वीर-ए-नूरानी के सदक़े शह-ए-इक़्लीम-ए-'इरफ़ानी के सदक़े जनाब-ए-ग़ौस-ए-समदानी के सदक़े मु'ईनुद्दीन अजमेरी के क़ुर्बां मुहियुद्दीन जीलानी के सदक़े बना है सीना गुलज़ार-ए-ख़लीली मैं अपने दर्द-ए-पिनहानी के सदक़े तसद्दुक़ मह-जबीनों पर ज़माना मैं अपने पीर-ए-ला-सानी के सदक़े फ़िदा बेदम 'अली के लाडलों पर रसूलुल्लाह के जानी के सदक़े शायर: बेदम शाह वारसी ना'त-ख़्वाँ: हूरीआ फ़हीम ruKH-e-mahboob-e-sub.haani ke sadqe mai.n us tasweer-e-nooraani ke sadqe shah-e-iqleem-e-irfaani ke sadqe janaab-e-Gaus-e-samdaani ke sadqe mu'eenuddin ajmeri ke qurbaa.n muhiyuddin jeelaani ke sadqe bana hai seena gulzaar-e-KHaleeli mai.n apne dard-e-pinhaani ke sadqe tasadduq mah-jabeeno.n par zamaana mai.n apne peer-e-laa-saani ke sadqe fida Bedam 'ali ke laaDlo.n par rasoolullah ke jaani ke sadqe Poet: Bedam Shah Warsi Naat-Khwaan: Hooria Faheem हिन्दी ENG

ठंडी ठंडी हवा रहमतों की चली / Thandi Thandi Hawa Rehmaton Ki Chali

ठंडी ठंडी हवा रहमतों की चली बन के मौज-ए-करम मुस्तफ़ा आ गए हल मेरी हो गईं ख़ुद-ब-ख़ुद मुश्किलें सारे 'आलम के मुश्किल-कुशा आ गए आ गए ! आ गए ! मुस्तफ़ा आ गए ! आ गए ! आ गए ! मुस्तफ़ा आ गए ! आमिना का मुक़द्दर सँवारा गया गोद में चाँद जिस की उतारा गया हूर-ओ-ग़िल्माँ सलामी को झुकने लगे पढ़ते रिज़वान सल्ले 'अला आ गए आ गए ! आ गए ! मुस्तफ़ा आ गए ! आ गए ! आ गए ! मुस्तफ़ा आ गए ! दोनों 'आलम की क़िस्मत बदलने लगी नूर में सारी कौनैन ढलने लगी ख़ुश-मुक़द्दर हलीमा ! मुबारक तुझे गोद में तेरी ख़ैर-उल-वरा आ गए आ गए ! आ गए ! मुस्तफ़ा आ गए ! आ गए ! आ गए ! मुस्तफ़ा आ गए ! बन गई है ज़मीं रश्क-ए-बाग़-ए-जिनाँ सज गए आसमाँ, खिल उठे गुल्सिताँ माँग लो रहमतें, खोल लो झोलियाँ दे ने ख़ैरात हाजत-रवा आ गए आ गए ! आ गए ! मुस्तफ़ा आ गए ! आ गए ! आ गए ! मुस्तफ़ा आ गए ! आज कोई भी, साइम ! न ख़ाली रहे सब मुरादें मिलें, हर मुसीबत टले मदनी आक़ा की आमद का सदक़ा मिले भीक ले ने को हम, या ख़ुदा ! आ गए आ गए ! आ गए ! मुस्तफ़ा आ गए ! आ गए ! आ गए ! मुस्तफ़ा आ गए ! शायर: अल्लामा साइम चिश्ती ना'त-ख़्वाँ: हूरिया फ़हीम क़ाद...

साहिब-ए-ताज वो, शाह-ए-मेअ'राज वो (दुरूद-ए-ताज | मंज़ूम तर्जुमा) / Sahib-e-Taaj Wo, Shaah-e-Mea'raj Wo (Durood-e-Taaj | Lyrical Translation)

साहिब-ए-ताज वो, शाह-ए-मेअ'राज वो शह-सवार-ए-बुराक़-ओ-अमीर-ए-अ'लम दाफ़े-ए-हर-बला, दाफ़े-ए-हर-वबा दाफ़े-ए-क़हत-ओ-अमराज़-ओ-रंज-ओ-अलम साहिब-ए-ताज वो, शाह-ए-मेअ'राज वो इस्म लिखा गया, इस्म ऊँचा हुआ इस्म मोहर-ए-क़बूल-ए-शफ़ाअ'त भी है इस्म की बरकतें, इस्म की रौनक़ें इस्म लोह-ओ-क़लम की अमानत भी है क्या अ'रब ! क्या अ'जम ! सब के सरदार हैं सब के सरदार का है मुक़द्दस बदन हरम-ओ-का'बा को वो जो मुनव्वर करे वो महकती, वो पाकीज़ा सी इक किरन साहिब-ए-ताज वो, शाह-ए-मेअ'राज वो चाश्त-गाहों का सूरज वजूद आप का आप हर शब की ज़ुल्मत के माहताब हैं सदर बज़्म-ए-बुलंदी-ओ-रिफ़अ'त के हैं राह-गुज़ार-ए-हिदायत के माहताब हैं सारी मख़्लूक़ की हैं वो जा-ए-अमाँ सारी तारीकियों के वो रौशन चराग़ नेक तीनत हैं वो, नेक अतवार हैं उन के हाथों में है बख़्शिशों के अयाग़ साहिब-ए-ताज वो, शाह-ए-मेअ'राज वो सर से पैरों तलक वो करम ही करम रब हिफ़ाज़त करे बिल-यक़ीं आप की उन के ख़िदमत-गुज़ारों में जिब्रील है और सवारी बुराक़-ए-हसीं आप की सफ़र उन का है मेअ'राज और सिद्रतुल- मुंतहा मुस्तक़र और मक़ाम उन का है ...